caricature

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ya! its me

गुरुवार, सितंबर 25

आप को मालूम है हम जिसे आम भाषा में आम जनता कहतें हैं क्या करती है घटना के बाद बड़ी बड़ी बातें करती है फिर सब अपने अपने घर जातें हैं और लम्बी तान कर सो जातें हैं और जब बदलाव करने का वक़्त आता है मतलब जब चुनाव का वक़्त आता तो छुट्टी का फायदा उठाते हैं पिकनिक मनाने जातें है दोस्तों के घर जातें हैं पर वोट देने नहीं जाते ज्यादातर जो लोग वोट देने जाते हैं उनकी राजनितिक समझ इतनी विकसित नहीं होती सबके लिये नहीं कह रहा हूँ उन लोगों के कह रहा हूँ जो कम पढ़े लिखे हैं वो उन्ही नेताओं को चुनते हैं जो उनका तात्कालिक फायदा करवा सके देशहित की बात ना तो ऐसे नेता सोच सकते और ना ही उनको चुनने वाले लोग परिणाम हमें हर पांच बरस में उन्ही चोरों और डाकुओं में से मंत्री चुनने पड़ते हैं और येही आर बार होता है