शनिवार, अगस्त 28
हाय ये धर्म की दुकानदारी
लाजपत नगर रिंग रोड से मुझे अक्सर निकलना होता है कई सालों से मैं वहां से जा रहा हूँ। टाइम पास करने के लिए अक्सर मैं खिड़की के पास की सीट को प्राथमिकता देता हूँ। रोज वही सब देखता था पर ऐसा नहीं है कि जो रोज देखता था उसमे कोई बदलाव ही नहीं आता था बिलकुल आता था रोज सड़क पर मुझे तरक्की का नज़ारा मुझे रोज देखने को मिलता था। लाजपत नगर मार्केट के पास रिंग रोड से लगे हुए दो मंदिर थे। जितनी तरक्की मैंने इन दो मंदिरों की देखि उतनी तेज प्रोग्रेस मैंने कभी किसी की नहीं मेंरे देख ते देखते दोनों मंदिर, मंदिर से कब दुकानों में तब्दील हो गए मुझे पता ही नहीं चला। यदि आपको भी ये चमत्कार देखना तो आप भी जा कर देख सकते हो
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