caricature

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ya! its me

सोमवार, मार्च 1

नक्सलवादी चाहे ये दावा करें कि वो जनता के हित के लिए हथियार उठाये हुए हैं पर इस बात से वो चाह कर भी इनकार नहीं कर सकते कि इनकी गोली से चाहे पुलिस का आदमी मरे, मुखबिर मरे या फिर आम आदमी हैं तो सारे इसी समाज का हिस्सा सारे आपस में किसी ना किसी तरह इंटरकनेक्टेड हैं। नक्सलवादी कहते हैं कि उन्होंने सरकार के अन्याय के खिलाफ आवाज और हथियार उठाया है पर मैं कहता हूँ कि सरकार से भी अत्याचारी तो ये खुद हैं । आखिर किसने इन्हें अपने हक कि लड़ाई लड़ने के लिए नियुक्त किया है और यदि किसी ने किया भी हैं तो इससे इन्हें मनमाफिक हत्याएं करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता ये अपनी बहादुरी ऐसे लोग पर दिखाते पास अपने नून रोटी का जुगाड़ सोचने से अहम् मुद्दा कुछ नहीं होता।