यहाँ तो ये कहना भी बेमाने है की दंगे रोकना और आम जनता की जानमाल की हिफाज़त करना किसी भी राज्य और केन्द्र की नैतिक जिम्मेदारी है ऐसा मै इसलिए कह रहा हूँ शायद ज्यादातर प्रबुद्धजन इस तथ्य से भली भांति परचित होंगे की जब केन्द्र में कांग्रेस सरकार थी तो उसने इंदिरा गाँधी की हत्या का बदला सिखों के खिलाफ दंगे करवा कर लिया आज भी सिख अपने समुदायके साथ हुई नाइंसाफी के लिए इंसाफ की बाट जोह रहे हैं और बीजेपी ने भी गुजरात में बहुत मत पाने के लिए, हिंदू वोटों के एकमुश्त फसल काटने के लिए राज्य प्रायोजित दंगे करवाए और मार्क्सवादी पार्टियों का तो कहना ही क्या सिंगुर और नंदीग्राम में इनकी कारगुजारिओं को कौन भूल सकता है इसलिए सरकार चाहे वो केन्द्र में हो या राज्य में हो उससे इस बात की आशा करना की वो दंगे से आमजन की रक्षा करेगी अपनेआप को मुर्ख बनाना है
अब वापिस पंजाब लौटते हैं। दूर देश वियना में दो संतों पर गोलियां चलती है वहां की पुलिस ठीक समय पर कार्रवाई भी करती है पर इस देश में संत के अनुयाई वहां की पुलिस की इमानदारी पर विश्वास ना करते हुए तोड़फोड़ की कार्रवाई शरू कर देते हैं पता नही इन दो संतों ने अपने भक्तों को क्या उपदेश दिया था पर इतना मुझे विश्वास है की ये नही कहा होगा की तुम ट्रेनों को आग लगाओ,लोगों की हत्या करो ,बसों को आग के हवाले करो। मेरे विचार से सब दुसरे अच्छे संतों की तरह इन्होने भी अपने भक्तों को भले काम करने का ही उपदेश दिया होगा पर इसके बावजूद जो लोग इन संतों के शिष्य होने के नाम पर दंगे कर रहे वो इन संतों के सच्चे शिष्य नही बल्कि गुंडे बदमाश जिनके ख़िलाफ़ प्रभावित जनता को पुलिस की राह ना देखते हुए ख़ुद एक्शन लेकर अपने क्षेत्र से इन्हे भगा देना चाहिए
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