सोमवार, अगस्त 10
दिल्ली भारत की राजधानी हिंदुस्तान का दिल , या यूं कहें की दिलदार रईसों का स्वर्ग । इसी स्वर्ग की सड़कों पर नर्क बहुत से गरीबों को अपनी गिरफ़्त में दबोचे पसरा पड़ा है। यहाँ एक तरफ तो ऊंची -ऊंची बिल्ड्गें हैं तो दूसरी तरफ सडांध मारते गरीब तबके के झोपडे हैं। इस शहर में गरीब और अमीर के बीच खाई इतनी गहरी और चौडी है की अब शायद ही इसे पाटना सम्भव हो और ये फर्क दिल्ली की सड़कों पर और ज्यादा दिखाई देता है जहाँ की सड़कें धनवानों की महंगी और आलिशान कारों से अटी पड़ी ट्रैफिक जाम किए रहती हैं ।उन्ही कारों के चारों तरफ मंडराते छोटे मासूम बच्चे अपने नन्हे हाथों में बेचने के लिए छोटे- मोटे सामान जैसे गुलदस्ते, अगरबत्ती के पैकेट, डायरी, पत्रिकांए अखबार आदि थामे गाड़ियों में बैठे लोगों से कुछ ना कुछ खरीद लेने की मनुहार करते नज़र आते हैं। कभी घुड़क दिए जाते हैं तो कभी कोई उनकी गरीबी पर तरस खा कर कुछ खरीद भी लेता है। सामन बिकने और हाथ में दो पैसे आ जाने की खुशी उनके चेहरे पर देखते ही बनती है। क्या ये खुशी ये संतोष किसी सेठ के एक बड़ी deal कर लिए जाने ke आत्माभिमान से क्या कुछ कम होता है?कोई भी मौसम इन्हे सड़कों पर इस तरह भटकने से नही रोक सकता। पेट की आग के सामने गर्मी की लू के थपेड़े, बरसात की झमाझम और कड़कडाती सर्दी सब बौने नज़र आते हैं। उन मौसमों में जब लोग अपने घरों से निकलना गवारा नही करते ये बच्चे आपको लाल बत्ती चौराहों पर अपने सामान का प्रचार करते नज़र आ जायेंगे । एक तो इनकी रोड पर दुकान तिस पर इनके सामन की घटिया क्वालटी भला ऐसे में सिर्फ़ ब्रांडेड सामन खरीदने वाला धनिक इनके सामन की तरफ़ क्यों आकर्षित हो ये ही कारण है की कभी किसी की फटकार तो कभी तिरस्कार तो कभी ट्रैफिक हवलदार की मार खाने के बाद भी इतनी कमाई नही हो पाती की वो अपनी कमाई से रात का खाना खा सकें। तब या तो भूखे पेट सोना पड़ता है या फिर माँ-बाप की मजदूरी से कमाए हुए पैसों से ही नसीब हो पाता है। चौराहों पर सिसकता, करहाता बचपन ना तो दिल्ली को पेरिस से भी सुंदर बनाने का सपना देखने वाली सरकार को ही नज़र आता ना ही उन उद्योगपतियों को दिखाई देता जो भारत को एक ग्लोबल ब्रांड बनाना चाहते हैं। क्या कोई ऐसा राजनितिक या औद्योगिक घराना है जिसे ये धूल-धूसरित भविष्य नज़र आता हो । अगर हाँ तो क्यों नही आगे बढ़ कर सड़क पर बिखरे इन फूलों को अपने आँचल में समेटते ताकि ये भी अपनी योग्यता से भारत के भविष्य को संवार संके
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