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ya! its me

सोमवार, अगस्त 10

एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में मच्छरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आप सोच रहे होंगे की बैठे-बिठाये मेरे दिमाग में मच्छर क्यों भनभना रहे हैं। साहब आप का सोचना और मेरी मुर्खता को कोसना एक दम सवा सोलह आने वाजिब है। हमारा पड़ोस उत्तर प्रदेश दो नेताओं के आग्नेय वाक जाल में जल रहा है किसी की जबान जल रही है किसी का दिल जल रहा है तो किसी का मकान जल रहा है। यहाँ हमारा पड़ोस जल रहा है और दूसरी तरफ आप जैसे मुर्ख हैं जो मच्छर चिंतन में उलझे हुए हैं। इस जलन -जलन की बहस ने तो दिल्ली में कई लोगों की कई लोगों की रात की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। ऐसा कहने वालों को मैं ये भी तो कहा सकता हूँ की भाई तेली का तेल जले तो तुम्हारे पेट में क्यों गैस बने पर मैं ऐसा नही कहूँगा क्यों की दिल्ली की आम जनता की तरह मेरा मानना भी ये ही है की चाहे पॉलिटिक्स कहीं की भी क्यों ना हो दिल्ली की जनता का उस पर बहस करने तथा अपनी राय जताने का पूरा हक है बेशक ये पढ़ कर कुछ लोग मन ही मन ये सोच रहे हों की उत्तर प्रदेश के नेताओं के दिल, मकानों और जबान में लग रही आग की चिंता वहां की राजनितिक पार्टिया करे,उन पार्टिओं का आलाकमान करें, वहां के शासन के लिए जनादेश देने वाली जनता करे भला दिल्ली के लोग वहां हो रही घटनाओं के चक्कर में अपने मगज में क्यों हड़ताल करे। भाई! आपकी बात तो ठीक है पर आपको ये बात जरुर समझनी चाहिए ये दिल्ली की जनता का ये कर्तव्य भी है और अधिकार भी की वो विभिन्न राजनितिक और कुटनीतिक मुद्दे पर एक आम राय कायम कर देश के अखिल भारतीय नेताओं की ठोस और सही निर्णय लेने में मदद करे। ये बिल्कुल उसी तरह है जैसे मुंबई वालों का बोली वुड और होली वुड में बनने वाले सिनेमा पर अपनी एक्सपर्ट राय ज़ाहिर करने का अधिकार हो। तो जैसे मुंबई वालों ने पूरे जहाँ की फ़िल्म इंडस्ट्री का ठेका लिया हुआ है उसी तरह दिल्ली वालों ने पूरे विश्व की कूटनीति और राजनीति का कांट्रेक्ट लिया हुआ है। यहाँ तो पान की दुकान पर खड़े-खड़े ही भाई लोग अफगान समस्या, फिलिस्तीनी संकट, कश्मीर और आतंकवाद जैसी समस्याओं को तो ऐसे सुलटा देते हैं जैसे ये पान खा कर पिचकारी मारने जैसा मामूली काम हो। यहाँ तो पान की दुकान पर खड़े चबीयाते और बतियाते यार लोगों का ये दावा होता है की -बंधू ! पता नही काहे को ये साले फ़ौरन सेक्रेट्री और मंत्री लोग जनता का उल्लू काटने के लिए बॉर्डर इशु, कश्मीर समस्या जैसी झाडियों को बबूल का जंगल बना देते हैं एक बार हमें केस दे कर तो देखो दो दिन में ना इन सारी समस्याओं में पलीता ना लगा दिया तो हम अपने पड़ोसी के बेटे नही। दिल्ली की बाशिंदों और मुंबईकरों का टेम्परामेंट समझने के बाद आइये हम वापस अपने मच्छर चाचा के पास उड़ चलते हैं। मच्छरों और नेताओं का एक साथ चिंतन करने के बाद मैंने कुएं की गहराई तक जा कर सोचा और पाया की इनमें तो बहुत सी समानताएं हैं जिन्हें आप भी मुलाहिज़ा फरमाइए १.बरसात के बाद सर्दी या गर्मी ख़त्म होने के बाद मच्छर चंहूँ दिशाओं में उसी तरह नजर आते हैं जैसे विधान सभा भंग होने या मध्यावधि चुनाव के वक्त नेता बिरादरी । २ जिस तरह सर्दी ख़त्म होने पर मच्छर यदा कदा नज़र आते हैं उसी तरह हारे हुए नेता तो एक बार फिर भी दिखाई दे जाते हैं पर जीते हुए नेताओं के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं। ३ चुनाव नेताओं के उफान में आने का मौसम होता है तो बारिश वाली गर्मी मच्छरों के उफान में आने का मौसम होता है। ४ चुनाव जीतने के बाद नेता जनता का धन चूसते हैं तो मच्छर खून। ५ घोटाले करके जनता के खून पसीने की कमाई भ्रष्टाचार के माध्यम से चूसकर नेता जैसे लाल रुबीले हो जाते हैं उसी तरह मच्छर भी खून चूसने के बाद लाल रुबीला हो जाता है। ५ पाँच साल का समय चुकने के बाद नेता जैसे फिर जनता के पास बेशर्मी से वोट मांगने पहुँच जाता है ऐसे ही मच्छर आदमी का खून चूसने आ जाते हैं। ६ मच्छर को अदना सा मान कर मनुष्य उसे अभ्यागत मान लेता है उसी प्रकार दयालु मनुष्य नेता को नीरीह जीव मान उसे वोट दे कर जीतता है और बाद में अपनी गलती पर पछताता है। ७ वक्त आने पर नेता जैसे जनता को अपना नौकर मान कर उस पर अपना रौब गाठने लगता है। ऐसे मच्छर सेहतमंद होते ही आदमी के अस्तित्व को ही चुनौती देने लगता है। ८ मच्छर जैसे डेंगू, मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों का वाहक होता है नेता भी ऐसे ही करप्शन , भाई भतीजावाद, शिफारिश जैसे रोगों का वाहक होता है। ९ नेता लोग जैसे करप्शन करके दागी होकर बड़े बड़े ओहदों के पीछे छिप जाते हैं ऐसे ही मच्छर भी खून चूस कर अंधेरे कोने में छिप जाते है। १० मच्छरों के काटने से जैसे आदमी की जिन्दगी किसी रोग की कर्ज़दार हो जाती है उसी तरह नेता से पंगा लेकर आदमी की जिन्दगी जीने जीने को मोहताज़ हो जाती है। ११ मच्छर जैसे खून चूसने के बाद मरने से पहले आदमी का खून अपने बच्चों के मुंह में लगा देता है उसी तरह नेता भी इस दुनिया से रुखसत होने से पहले अपनी लीडरी अपने बच्चों के नाम कर जाता है। १२ मच्छर जैसे भिनभिना कर आदमी को ताली पीटने के लिए मजबूर कर देते हैं ऐसे ही नेता भी झूठे भाषण देकर बड़े -बड़े नारे लगवा कर जनसमूह को ताली बजाने के लिए बाध्य कर देते हैं १३ दिल्ली के नेता जिस तरह बड़ी बड़ी कोठियों में रहते हैं उसी तरह मच्छर भी बड़े -बड़े नालों और विशाल पार्कों की घास में रहते हैं।नेताओं और मच्छरों में इतनी समानताएं देख कर मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ की-1 मच्छर एक दिन बड़े हो कर नेता बन जांएगे २ मच्छरों और नेताओं में खून का रिश्ता है ३ मच्छरों और नेताओं में जातीय समानता है ४ आने वाले वक्त में लोग इस बात में भेद नही कर पाएंगे की उनके ऊपर नेता राज़ कर हैं या भ्रष्टाचारी नेता ५ मच्छर और नेता दोनों ही देश के लिए हानिकारक हैं इसलिए भ्रष्ट नेताओं और मच्छरों को भागो देश बचाओ

1 टिप्पणी:

MAYUR ने कहा…

खत्रू चिन्तक हैं आप , आपने मछर की जान ही ले ली

अपनी अपनी डगर
sarparast.blogspot.com