caricature

caricature
ya! its me

शुक्रवार, अक्टूबर 12

अरविंद की नई पार्टी को मौका क्यों नहीं ?

 मैं ये मानने के लिए तैयार नहीं की अरविंद की टीम कांग्रेस की बी टीम है बेशक काला धन बड़ा मुद्दा है लेकिन काले धन को पैदा करने वाला भ्रष्टाचार और इस भ्रष्टाचार को खत्म करने वाला लोकपाल उससे भी बड़ा मुद्दा है....और काले धन के मुद्दे से तो सरकार फिर भी बचने का दूसरा रास्ता निकाल सकती थी पर लोकपाल ने सरकार की ईमानदारी पर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है..बेशक अरविंद की राजनीतिक महत्वकांक्षा हो और लेकिन अरविंद की टीम को कांग्रेस की बी टीम बताने वालों के तर्क निहायत ही खोखले हैं...औऱ तर्क भी ऐसे जो तार्किक ना लग कर प्रोपेगण्डा लगें अगर ये लोग वोट कटवा हैं भी तो ये कांग्रेस के ही वोट बैंक भी सेंध लगाएंगे किसी दूसरी पार्टी के वोट बैंक में नहीं....और वैसे भी देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी कौन सी दूध की धुली है वो तो अपने कर्मो से ही कांग्रेस की बी टीम नज़र आती है.... अभी बेशक विपक्ष में होने की वजह से एफडीआई और रिटेल मार्किटिंग जैसे मुद्दो पर सरकार को विरोध कर रही है पर अगर ये पार्टी खुद सत्ता में होते तो  कांग्रेस से भी ज्यादा जोर शोर से अमरीकी और भारतीय कॉरपोरेट समर्थक नीतियों को लागू करती....और विश्वास ना हो तो एक नजर आप राजग के शासन काल में लिए गए निर्णयों पर डाल  सकते हैं...जिसको देख कर आपको अंदाजा हो जाएगा कि बीजेपी खुद कांग्रेस की सबसे बड़़ी समर्थक है....तभी तो इस पार्टी को बनियों की पार्टी कहा जाता है....ये वो पार्टी है राम मंदिर की लहर पर सवार हो कर सत्ता में आई थी...और सत्ता में आते ही इस पार्टी ने सबसे पहले राम मंदिर के मुद्दे को दरकिनार करते हुए ठंडे बस्ते में डाला था जो एक बार सत्ता सुख भोगने का अधिकार देश की जनता ऐसे झूठे और वादा तोड़ने वालों को दे सकती है तो फिर अरविंद की नई पार्टी को क्यों नही. ?

कोई टिप्पणी नहीं: