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रविवार, जनवरी 6

पीड़ित या फायदा उठाने वाला ?

ज़ी न्यूज़ू पर सुधीर चौधरी का रेप पीड़ित के दोस्त के साथ किया हुआ इंटरव्यू देखा..देख कर ऐसा लगा कि पीड़ित चाहे पुलिसिया कार्रवाई से चाहे इतना नाराज ना हो पर सुधीर चौधरी और उनका चैनल पुलिस से खासा नाराज दिखाई दिया..भाई नाराज हो भी क्यों न...पुलिसिया जूर्म के तो सुधीर चौधरी भी भुक्त भोगी हैं....क्योंकि जब उन्होने नवीन जिंदल से कोयला खदान वाले मामले को दबाने के लिए रिश्वत मांगी थी...तो नवीन जिंदल ने उनके खिलाफु पुलिस में एफआरआई दर्ज करवा दी थी...और बेचारे सुधीर चौधरी को कुछ समय के लिए पुलिस रिमांड में जाना पड़ा था..और चूंकि पुलिस ने सुधीर चौघरी की खातिरदारी अच्छे से नहीं की थी इसलिए सुधीर चौधरी पुलिस से नाराज नज़र आ रहे थे...और जानबूझ को पीड़ित के मुंह से ज्यादा से ज्यादा पुलिस के खिलाफ जहर उगलवाना चाह रहे थे....और पीड़ित तो खैर पुलिस के अमानवीय रवैये उसे नाराज था ही....इसलिए उसने भी पुलिस के खिलाफ जहर उगलने में कोई कोताही नहीं की....मैं मानता हं कि पीड़ित के खिलाफ पुलिस का रवैय दोस्ताना नहीं था....लेकिन अगर तर्कपूर्ण ढंग से सोचा जाए तो ऐसा राक्षसी भी नहीं था जिसकी इतनी मुखालफत की जाए...पीड़ित को शायद ये नहीं मालूम की पीसीआर वैन का काम तुरंत पीड़ित को मदद पहुंचाना होता है...पीसीआर की कोई ज्यूरीडिक्शन नहीं होती..और उसकी मदद के लिए तो तीन तीन पीसीआर वैन पहुंची थी...दूसरा आम जनता पर ये आरोप लगाना कि जनता ने उसकी कोई मदद नहीं की..बड़ा अजीब सा अहसास दिला रहा है कि अगर उसकी कोई मदद नहीं करता तो शायद वो सच में जिंदा नहीं होता..

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