गुरुवार, फ़रवरी 4
भ्रष्टाचार की गंगा
तो स्टोरी को आगे लेकर चलते हैं -जैसा की मैंने पहले ही बताया कि गंगा अब लोगों कि नजर में चढ़ चुकी थी कई सारे स्वयंसेवी सगठनों ने गंगा कि रक्षा के लिए अवतार ले लिया था। जिन्हें सरकार से गंगा कि सफाई के नाम पर मनमाफिक ग्रांट मिल रही थी ऐसे में गंगा कि सफाई का स्वांग भरने में भला बुराई ही क्या थी । अभी इस ढकोसले में एक बड़े खिलाड़ी का आना बाकि था और उस खिलाड़ी का नाम था विश्वा हिन्दू परिषद् , स्वघोषित हिन्दुओं का सबसे बड़ा हितैषी। गंगा ,गौ की रक्षा की कसम खाने वाले इस संगठन ने सच में गंगा को बचाने के लिए एक बहुत बड़े आन्दोलन का सूत्रपात किया काफी हद तक दूसरों के मुकाबले अपने अभियान में इसे सफलता भी मिली माँ गंगा के भक्तों के दिलों में इस संगठन ने जगह भी बनाई। अभी पूरी सफलता मिली भी नहीं थी किराम मंदिर आन्दोलन का वक़्त आ गया ,गंगा बचाओ आन्दोलन से मिली सफलता को इस संगठन ने राम मंदिर मुद्दे में भुनाया और अब गंगा को बचाना छोड़ कर राम मंदिर बनवाने लगे। बीजेपी को सत्ता कि सीढ़ी चढ़वाने लगे। इस तरह से विश्वा हिन्दू परिषद ने गंगा का इस्तेमाल सिर्फ प्रसिद्धी पाने के लिए किया। अब बाबा रामदेव कि बारी है वो भी लोगों को गंगा को बचाने के लिए गोलबंद कर रहे हैं । कुम्भ का वक़्त है गंगा में सिर्फ नाक डूबा कर डूब मरने का ही पानी बचा है । हरिद्वार में तमाम भारत के साधू संत जमा हो रहे हैं देखें क्या होता है अभी मैंने बाबा रामदेव कि बात उपर की थी। भाई सेलिब्रेटी आदमी हैं मीडिया उनके साथ है शायद अब की बार कुछ चमत्कार हो ही जाए लकिन मुझे ना जाने क्यों लगता है की वो सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ही इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं जहाँ तक इलेक्ट्रोनिक मीडिया का सवाल हैं तो भाई यहाँ जो दिखता है वो ही बिकता है मिडिया जानती है की आम हिन्दू जनमानस गंगा से बहुत ही गहरे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है इस लिए इस गंगा में हो रहे प्रदूषण तथा सरकार की लापरवाही पर कार्यक्रम बना कर आसानी से काफी साडी एड और टी। र पी बटोरी जा सकती है। अब कुछ विराम देता हूँ इस मुद्दे पर हम आगे बात करेंगे। जारी...........
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